ऐसे थे सद्गुरु हमारे
युगपुरुष मौनी बाबा
Born 6 February 1863 · Kahra Gram · Spiritual Guide of Kosi Region
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परमपूज्य मौनी बाबा
परमपूज्य मौनी बाबा — जन्म नाम श्री मनमोहन मिश्र — बिहार के कोसी क्षेत्र के उन विरले संतों में गिने जाते हैं जिन्होंने योग, साधना, सेवा और आध्यात्मिक जागरण को जीवन का केंद्र बनाया। उनका जन्म 6 फरवरी 1863 को ग्राम कहरा, थाना मधेपुरा (तत्कालीन जिला भागलपुर) में पं. बुलाकी मिश्र के घर हुआ।
काशी में वेदांत और ज्योतिष की शिक्षा, गोरखपुर में योग दीक्षा, बद्रीनाथ यात्रा के बाद सदाकाल के लिये मौन व्रत — इस असाधारण जीवन का हर पड़ाव उनकी दिव्यता का प्रमाण है। 6 फरवरी 1945 को — ठीक अपने जन्मदिन पर — वे समाधिस्थ हुए।
लोक-मान्यताएँ एवं चमत्कार
Divine Beliefs & Miraculous Memoirs of Mouni Baba
फाँसी की सज़ा से मुक्ति
स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व सांसद अनूप लाल मेहता को आज़ादी की लड़ाई में फाँसी की सज़ा होने वाली थी। जब वे हताश होकर कहरा कुटी पहुँचे, तो बाबा ने उन्हें आत्मीयता से बैठने का संकेत (बैठने का आदेश) दिया, जिससे उनका मनोरथ सिद्ध हुआ और फाँसी की सज़ा टल गई।
"साधुओं की जात नहीं होती"
कंटर नास्तिक दारोगा कैलाश झा को बाबा के दर्शन कर असीम शांति मिली। जब उन्होंने जातिगत नियमों के कारण प्रसादी लेने में संकोच किया, तो बाबा ने लिखकर समझाया: "साधुओं की जात नहीं होती।" इसके बाद न केवल उन्हें पुत्र रत्न प्राप्त हुआ, बल्कि वे तरक्की पाकर पुलिस अधीक्षक (SP) बने।
शिक्षा और कला का सम्मान
बाबा कला प्रेमी थे और कलाकारों को कुटी की ओर से पुरस्कृत करते थे। साथ ही, उन्होंने आधुनिक शिक्षा के महत्व को समझाते हुए धबौली कुटी के गुरु गोवर्द्धन प्रसाद सिंह से कहा था: "भिन्न-भिन्न भाषाओं को सीखकर सही रत्न की खोज करो, यही जीवन की सार्थकता है।"
"प्रकाश के माध्यम से वस्तुस्थिति आँखों के सामने आ जाती है - वस्तुस्थिति का सहारा ले प्रकाश को हम नहीं पा सकते।"
— परमपूज्य मौनी बाबा (अध्यात्म दर्शन, 1950)क्रांति और अध्यात्म का संगम
The Patriotic & Revolutionary Legacy of Mouni Baba
देश-प्रेम और गुप्त क्रांतिकारी शरण
परमपूज्य मौनी बाबा के हृदय में राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए अगाध तड़प थी। उनके नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने 1930 में सुखासन की फुलवारी में नमक कानून तोड़ा था।
बाबा की कहरा कुटी और काशी प्रवास के दौरान क्रांतिकारियों को गुप्त शरण, सुरक्षा और भोजन मिलता था। अंग्रेजी खुफिया विभाग के लाख प्रयासों के बाद भी बाबा ने क्रांतिकारियों की सुरक्षा की।
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चन्द्रशेखर आज़ाद का काशी प्रवास
महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद (पंडित जी) ने गुप्तवेष में काशी में बाबा की सेवा की और राष्ट्र-सेवा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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जयप्रकाश नारायण (JP) का भोजन चमत्कार
हजारीबाग जेल से फरारी के दौरान खपौती जंगल में भूखे जेपी को बाबा की दिव्य प्रेरणा से अज्ञात युवक भोजन दे गया था।
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गोरा पलटन के अधिकारी का समर्पण
बाबा के गिरफ्तारी वारंट पर जब वे बोले "मुझे पकड़ के ले चलो", तो अंग्रेज अधिकारी विस्मित होकर उनके चरणों में झुक गया।
कहरा कुटी धाम का महत्त्व
The Sacred Healing Abode of Mouni Baba
असाध्य रोगों से मुक्ति एवं जड़ी-बूटी चमत्कार
कुटी पर डॉक्टरों द्वारा उपेक्षित एवं असाध्य रोगों से पीड़ित लोग आते थे और स्वस्थ होकर लौटते थे। बाबा अपनी अलौकिक शक्ति भक्तों में संचारित करते थे, जो उनके निर्देश पर कोई भी साधारण जड़ी-बूटी छूकर मरीजों को दे देते थे और वे रोगमुक्त हो जाते थे।
बाबा के आशीर्वाद से पं. चिरंजीव झा, ठाकुर प्रसाद सिंह, पं. जगदीश झा, सियाराम मंडल, पं. जलधर झा एवं अवध नारायण सिंह जैसे भक्तों ने लोक-कल्याण के इस महान कार्य में सहयोग किया।
पवित्र मिट्टी एवं संतान सुख
कहरा कुटी की पवित्र मिट्टी में वह दिव्य आलोक है जिससे अनगिनत सूनी गोद हरी हुई और संतानहीनों को संतान सुख मिला। बाबा के ही आशीर्वाद से मधेपुरा के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सतीश ने अतुल्य यश और कीर्ति प्राप्त की थी।
बाबा की यह दैविक शक्ति आज भी कुटी की मिट्टी और कण-कण में विद्यमान है। मिट्टी के हर हिस्से में अध्यात्म, सांख्य और कर्मयोग की सरल धारा बहती है। बस आवश्यकता है तो सच्चे श्रद्धा और विश्वास की।
"कौन कहता है कहरा कुटी वीरान हो गई या बाबा चले गए? बाबा आज भी हमारे बीच अदृश्य रूप में विद्यमान हैं और हमारा सच्चा मार्गदर्शन कर रहे हैं।"
शिव-शक्ति और दिव्य सर्प लीला
Grace of Lord Shiva, Parvati & The Two Divine Serpents
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कुटी के दो विशालकाय सर्प
कहरा कुटी में बाबा के सानिध्य में दो विशालकाय सांप रहते थे, जिन्हें बाबा स्वयं अपने हाथों से दूध पिलाते थे। उनके महाप्रयाण से पूर्व ही दोनों सांपों ने शरीर त्याग दिया, जिनका बाबा ने स्वयं अंतिम संस्कार किया था।
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साक्षात् पार्वती स्वरूपा माँ (शून्य आसन)
अस्सी संगम के बड़ा जगन्नाथ जी मंदिर परिसर में रहने वाली दिव्य माता को बाबा साक्षात् पार्वती मानते थे। भक्तों ने स्वयं माता का आसन पृथ्वी से ऊपर शून्य (हवा) में तैरते देखा था।
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गोरखपुर में भगवान शंकर के दर्शन
गोरखपुर में योग साधना के दौरान साक्षात् भगवान शंकर ने संन्यासी बाबा के वेश में आकर मौनी बाबा को योग मुद्रा के विशिष्ट रहस्यों का ज्ञान कराया था।
बद्रीनाथ में मौन समर्पण एवं श्मशान साधना
भगवान शिव की विशेष अनुकंपा के फलस्वरूप ही बाबा ने बद्रीनाथ में अपनी प्रियवाणी शिव चरणों में अर्पित कर सदा के लिए मौन धारण कर लिया था।
काशी प्रवास के समय बाबा मध्यरात्रि में भक्तों से छिपकर श्मशान साधना के लिए निकल जाते थे। आज भी स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मध्यरात्रि में मणिकर्णिका श्मशान के समीप दिव्य डमरू की ध्वनि सुनाई देती है।
पावन भूमि मिथिला और मौनी बाबा
The Sacred Land of Mithila & Mouni Baba's Eternal Abode
काशी के पापों का शमन करने वाली भूमि
परमपूज्य मौनी बाबा के शब्दों में: "सर्व पाप विनस्यति वाराणसी और वाराणसी कूतं पाप मिथिलायाम् विनस्यति" अर्थात काशी में शरीर त्यागने से सभी पाप मिट जाते हैं, परंतु काशी में किए गए पापों का निवारण केवल मिथिला की पवित्र मिट्टी ही कर सकती है।
इसीलिए बाबा ने अपने महाप्रयाण के लिए काशी के बजाय अपनी जन्मभूमि मिथिला (कहरा ग्राम) को ही चुना। मिथिला की भूमि राजा जनक, गार्गी, मैत्रेयी, याज्ञवल्क्य, गौतम ऋषि और मंडन मिश्र की साधना स्थली रही है।
"मिथिलां ये नमस्यन्ति देशान्तर गता अपि तेषां मुक्तिश्च भुक्तिश्च जायते नात्र संशयः।"
- ऋषि-संतों की तपोभूमि: सहरसा का महिषी (मंडन मिश्र-भारती धाम) और बनगाँव (लक्ष्मीनाथ गोस्वामी कुटी) इसी पावन भूमि में हैं।
- अहल्या उद्धार व श्रृंगी ऋषि: अहल्या उद्धार स्थल अहैरी एवं श्रृंगी ऋषि का सिहेश्वर नाथ (मधेपुरा) इसके प्रमुख अंग हैं।
- रामायण व महाभारत काल: जगज्जननी सीता की जन्मस्थली एवं विराटपुर (सहरसा) जहाँ पांडवों ने गुप्तवास बिताया था।
आज का दैनिक पंचांग
Today's Regional Panchang Details — 25 July 2026
Mithila Panchang (मिथिला)
Varanasi Panchang (वाराणसी)
भक्तों की डायरी से (ऐतिहासिक संस्मरण)
From the Diaries of Devotees – Divine Memoirs & Miracles
श्री विन्देश्वरी प्रसाद मंडल
पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार"बाबा में जाति-पात एवं ऊँच-नीच का कोई भेद-भाव नहीं था। वे सच्चे अर्थों में महात्मा थे। उनका जीवन जनहित में अर्पित था।"
पं० चिरंजीव झा
कहरा-मदनपुरकाला नाग विष मुक्ति और तीर्थाटन के नियम: "बिना टिकट रेल यात्रा न करना और तीर्थ में किसी से कुछ न मांगना" - बाबा की दिव्य सीख एवं रामेश्वरम के अलौकिक दर्शन।
श्री सियाराम मंडल
जगबनी, सहरसा40 वर्षों तक केवल दूध व पानी का आहार लेने वाले भक्त के परिवार की मानसिक बीमारी से मुक्ति, अनपढ़ भाई का रामायण कंठस्थ करना और असाध्य रोगमुक्ति।
भक्तों के अनुभव
Devotee Experiences
"मौनी बाबा के दर्शन से मेरे जीवन में एक नई ऊर्जा और शांति का संचार हुआ। उनकी शिक्षाओं ने मुझे जीवन का सही मार्ग दिखाया।"
"आश्रम आकर मन को जो शांति मिली, वह अतुलनीय है। बाबा की वाणी में अद्भुत प्रभाव है।"
आश्रम गतिविधियों से जुड़ें
आश्रम की सेवाओं, शिक्षा और जनकल्याण कार्यों में भागीदार बनें। सेवा या प्रार्थना अनुरोध भेजें।
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आगामी आयोजन
Upcoming Events & Gatherings