दैनिक पंचांग

मिथिला एवं वाराणसी का दैनिक पंचांग विवरण

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सुझाव:
09 June 2026 (Tuesday)

🚩 मिथिला पंचांग (Mithila)

क्षेत्रीय मैथिल पंचांग परंपरा
🪐मास / महीना ज्येष्ठ (Jyeshtha)
🌙पक्ष कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha)
📅तिथि एकादशी (Ekadashi)
🌌नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद
🌀योग ब्रह्म
⚙️करण किंस्तुघ्न
🌙राशि मीन (Pisces)
☀️सूर्य राशि मिथुन (Gemini)
🔱संवत् विक्रम: 2083 शक: 1948
🌅सूर्योदय / सूर्यास्त 05:01 AM 06:58 PM
🌟शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त: 11:45 AM - 12:35 PM
🚫राहुकाल राहुकाल: 04:30 PM - 06:00 PM (Rahu Kalam)
🎉त्यौहार व व्रत
विशेष टिप्पणी (Special Note):

मिथिला पंचांग पद्धति के अनुसार शुभ दिन।

🚩 वाराणसी पंचांग (Varanasi)

पारंपरिक वाराणसी पंचांग पद्धति
🪐मास / महीना ज्येष्ठ (Jyeshtha)
🌙पक्ष कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha)
📅तिथि एकादशी (Ekadashi)
🌌नक्षत्र रेवती
🌀योग विष्कुम्भ
⚙️करण किंस्तुघ्न
🌙राशि मीन (Pisces)
☀️सूर्य राशि मिथुन (Gemini)
🔱संवत् विक्रम: 2083 शक: 1948
🌅सूर्योदय / सूर्यास्त 05:05 AM 06:56 PM
🌟शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त: 11:40 AM - 12:30 PM
🚫राहुकाल राहुकाल: 04:00 PM - 05:30 PM (Rahu Kalam)
🎉त्यौहार व व्रत
विशेष टिप्पणी (Special Note):

वाराणसी पंचांग पद्धति के अनुसार शुभ दिन।

पंचांग ज्ञानकोश एवं विस्तृत विश्लेषण

वैदिक कालगणना के पाँच अंग तथा विभिन्न पंचांग पद्धतियों का शास्त्रीय विश्लेषण।

पंचांग के पाँच अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण)

पंचांग हिन्दू कालगणना का मूलाधार है। यह पाँच अंगों से मिलकर बना है — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। प्रत्येक अंग का हमारे दैनिक जीवन और शुभ मुहूर्त निर्धारण में विशेष महत्व है।

🌙1. तिथि (Tithi)

सूर्य और चंद्रमा के बीच 12° के देशांतर अंतर को एक तिथि कहा जाता है। एक चन्द्र मास में कुल 30 तिथियाँ होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (1-15) और कृष्ण पक्ष (1-15) में विभाजित होती हैं।

वर्ग तिथियाँ स्वभाव
Nanda (नंदा)1, 6, 11शुभ / आनंद
Bhadra (भद्रा)2, 7, 12मंगलकारी
Jaya (जया)3, 8, 13विजय / उत्साह
Rikta (रिक्ता)4, 9, 14रिक्त / अशुभ
Purna (पूर्णा)5, 10, 15पूर्णता / सिद्धि
🌞2. वार (Vara)

सप्ताह के सात दिनों में से प्रत्येक दिन को वार कहते हैं। प्रत्येक वार का निर्णय सूर्योदय से होता है तथा उस वार के स्वामी ग्रह के अनुसार उसका शुभ-अशुभ प्रभाव माना जाता है।

  • रविवार (सूर्य)
  • सोमवार (चंद्र)
  • मंगलवार (मंगल)
  • बुधवार (बुध)
  • गुरुवार (गुरु)
  • शुक्रवार (शुक्र)
  • शनिवार (शनि)
3. नक्षत्र (Nakshatra)

संपूर्ण आकाश मंडल को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र का भोग करता है। नक्षत्रों के स्वामी और उनके आराध्य देवता कार्य सिद्धि और चरित्र निर्धारण में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

27 नक्षत्र वर्गीकरण स्थिर (रोहिणी/उत्तरा), क्षिप्र (अश्विनी/पुष्य), चर (पुनर्वसु/श्रवण), उग्र (भरणी/मघा), तीक्ष्ण (आर्द्रा/ज्येष्ठा), मृदु (मृगशिरा/रेवती), मिश्र (कृत्तिका/विशाखा)
🔯4. योग (Yoga) & 5. करण (Karana)

योग सूर्य और चंद्र के देशांश का योग है (27 योग होते हैं, जैसे प्रीति, आयुष्मान, सिद्धि)। करण एक तिथि का आधा भाग होता है (कुल 11 करण होते हैं, जिसमें 7 चर और 4 स्थिर हैं)।

भद्राकाल (विष्टि करण) एवं व्यतिपात/वैधृति योग में शुभ कार्य सर्वथा वर्जित हैं।

Mithila vs Varanasi Panchang Comparison

यद्यपि दोनों परंपराएँ शास्त्रीय सूर्य-सिद्धांत पर आधारित हैं, फिर भी देशांतर, सूर्य संक्रांति और स्थानीय लोक संस्कृति के प्रभाव से पर्वों की तिथि और विवाह मुहूर्त निर्धारण में सूक्ष्म अंतर पाया जाता है।

पहलू / मानदंड 🚩 Mithila Panchang (मिथिला) 🚩 Varanasi Panchang (वाराणसी)
प्रमुख क्षेत्र उत्तरी बिहार, झारखंड और नेपाल का तराई क्षेत्र (मिथिलांचल)। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं समस्त उत्तर भारत।
गणना का मुख्य ग्रंथ सूर्य-सिद्धांत + विद्यापति परंपरा एवं स्थानीय पंचांग ग्रंथ। काशी ज्योतिषाचार्य परंपरा, मुहूर्त चिंतामणि।
नव वर्ष / नव संवत् जुड़ शीतल (मेष संक्रांति - सामान्यतः वैशाख प्रथम तिथि)। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (विक्रम संवत् आरंभ)।
सूर्योदय संदर्भ बिंदु स्थानीय शहरों (दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी) के देशांतर अनुसार (+5 से +10 मिनट भिन्न)। वाराणसी काशी देशांतर (82°58' E)।
मुख्य पर्व व उत्सव जुड़ शीतल, मधुश्रावणी, सामा-चकेवा, कोजागरा (शरद पूर्णिमा), राम-सीता विवाह पंचमी। देव दीपावली, महाशिवरात्रि (काशी विश्वनाथ), अन्नकूट, गंगा दशहरा।
विवाह / उपनयन मुहूर्त मिथिला परंपरागत लग्न सारणी और नक्षत्र शुद्धि के कठोर नियम। मुहूर्त चिंतामणि एवं धर्मसिंधु के सामान्य दिशा-निर्देश।

चोघड़िया और ग्रहण (सूतक काल) निर्देश

चोघड़िया दिन और रात के समय में त्वरित यात्रा, खरीददारी अथवा कार्य आरंभ के लिए उत्तम मुहूर्त चुनने की सरल पद्धति है। ग्रहण काल में विशेष आध्यात्मिक साधना और सूतक काल के नियमों का पालन किया जाता है।

🕒 चोघड़िया वर्गीकरण एवं प्रभाव
नाम स्वामी ग्रह प्रकृति विहित कार्य
Amrit (अमृत) Moon (चंद्र) सर्वोत्तम सभी प्रकार के शुभ कार्य
Shubh (शुभ) Jupiter (गुरु) शुभ विवाह, यज्ञ, नवीन व्यापार
Labh (लाभ) Mercury (बुध) लाभदायक शिक्षा, व्यापार, वित्तीय सौदे
Char (चर) Venus (शुक्र) चलायमान यात्रा, वाहन क्रय, मशीनरी
Kaal (काल) Saturn (शनि) अशुभ दीर्घकालिक संग्रह, कृषि कार्य
Udveg (उद्वेग) Sun (सूर्य) अशांत सरकारी कार्य, वाद-विवाद
Rog (रोग) Mars (मंगल) हानिकारक विहित छोड़कर (दवा लेना)
🌑 ग्रहण सूतक काल नियम

सूतक काल वह अशुभ समय होता है जो ग्रहण लगने से पूर्व आरंभ होता है। इस अवधि में मंदिरों के पट बंद हो जाते हैं और देव आराधना के अतिरिक्त भौतिक कार्य वर्जित होते हैं।

🌞 सूर्य ग्रहण सूतक 12 घंटे पहले
🌙 चंद्र ग्रहण सूतक 9 घंटे पहले

*गंगा स्नान, दान-पुण्य और मंत्र जाप ग्रहण समाप्ति (मोक्ष) के पश्चात परम कल्याणकारी माने गए हैं।